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Robert Drake

वृत्तांत लेखन शिक्षकों का स्वागत​

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भारत के दूसरे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनका जन्म सन 1988 में तमिलनाडु के तिरुपति गांव में हुआ था। उनके विचार और मस्तिष्क की समझदारी ने पूरे देश को उनका सम्मान करने पर मजबूर कर रखा था। उनका यही कहना था कि शिक्षकों का देश की उन्नति में सबसे बड़ा योगदान होता है इसलिए शिक्षक वह होना चाहिए जो अपने ज्ञान और अनुभव से एक नए भविष्य का निर्माण कर सकें।

राष्ट्रपति बनने से पहले वे एक शिक्षक थे और सन 1962 में जब वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने तो उनके छात्रों ने बड़े ही उत्साहित होकर उनके जन्मदिवस को राधाकृष्णन दिवस जन्मदिन के रूप मे जश्न मनाने की ठान ली। परंतु उन्होंने अपने विद्यार्थियों को इस बात से इंकार कर दिया और कहा यदि मेरा जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय आप 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाए तो यह मेरे लिए गौरवपूर्ण सौभाग्य होगा।

बस फिर क्या था राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक रूप में मनाने का प्रचलन पूरे भारत में उसी समय से चल पड़ा। डॉ राधाकृष्णन के सबसे करीबी दोस्तों में से एक पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी अपना मत व्यक्त करते हुए कहा की “राधाकृष्णन ने अपनी क्षमताओं और बुद्धि के बलबूते पर देश की कई तरीके से सेवा की है। एक बेहतर व्यक्तित्व होने के साथ-साथ एक बेहतर और महान शिक्षक भी हैं जिनसे हमें अपने जीवन में बहुत कुछ सीखने को मिला है और आगे भी सीखने को मिलता रहेगा।”

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा की “राधाकृष्णन जैसा व्यक्तित्व महान दार्शनिक और महान शिक्षाप्रद है जिन्होंने राष्ट्रपति के रूप में अपनी एक महान मानवतावादी विचारों से भारत के अजीबोगरीब विशेष अधिकारों को पलट कर रख दिया।” यह एक ऐसे महापुरुष हैं जिनको हर व्यक्ति मान सम्मान की नजर से देखता है इसलिए उनकी बातों का सम्मान करते हुए प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर के दिन शिक्षक दिवस मनाया जाएगा।

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Polina
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